नहीं गूंज पाई

Posted By: Ajay Rawat Posted On: Aug 15, 2023
Taali Web series Review: सुष्मिता सेन

Taali Review: नहीं गूंजी 'ताली', फीके पड़े सुष्मिता के तेवर, दमदार कहानी की डायलॉग्स ने बचाई लाज

गौरी की लड़ाई एक प्रेरणा देने वाली कहानी है. ये कहानी ही इसलिए बन पाई है, क्योंकि ये आसान नहीं है. इससे एक इतिहास जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट में थर्ड जेंडर को मान्यता दिलवाने वाली गौरी, महाराष्ट्र इलेक्शन कमेटी की ब्रांड एम्बैसेडर बनने वाली पहली ट्रांसजेंडर गौरी की आपबीती बयां करना असल में मुश्किल काम है. ऐसे में डायरेक्टर कितना सफल हो पाए हैं, पढ़ें हमारा रिव्यू और जानें.

बड़े होकर क्या बनोगे? 'मुझे मां बनना है. गोल गोल चपाती बनानी है. सबका ख्याल रखना है.' इस तरह के सवाल पर जब एक पुलिस वाले का बेटा ऐसा जवाब दे तो बच्चों के बीच हंसी का पात्र बनना तो तय है. आप भी यही सोच रहे होंगे. लेकिन जवाब अगर एक ऐसा बच्चा दे, जो अपनी मूल पहचान से जूझ रहा है, तो आप क्या कहेंगे? एक ऐसा मानव शरीर जिसने जन्म तो लड़के के रूप में लिया है, लेकिन उसकी अंतर-आत्मा उसे चीख-चीख कर लड़की होने का एहसास दिला रही है. ऐसी ही एक कहानी को उजागर करती है, सुष्मिता सेन की हालिया रिलीज वेब सीरीज 'ताली'. तो चलिए आपको बताते हैं, कैसी है ये सीरीज, करते हैं रिव्यू.

ताली का ओवरव्यू सबसे पहले बात करते हैं 'ताली' सीरीज की कहानी की. ताली एक बायोग्राफिकल ड्रामा है, जो कि ट्रांसजेंडर एक्टीविस्ट श्रीगौरी सावंत की जिंदगी पर आधारित है. सीरीज दावा करती है कि इसमें श्रीगौरी के जीवन के हर जरूरी पहलुओं को दिखाया गया है. सीरीज में उनके ट्रांस का पता होने से लेकर बनने तक की पूरी स्टोरी को दिखाया गया है. गौरी यानी गणेश 13-14 साल की उम्र में घर से भाग गयी था, क्योंकि वो अपने पिता के लिए ताउम्र शर्मिंदगी का कारण नहीं बनना चाहता था. यहीं से गणेश का गौरी बनने का सफर शुरू होता है. गौरी ने जिंदगी की हर मुश्किल का सामना किया, हमेशा हालातों से लड़ीं लेकिन कभी ना तो भीख मांगी, ना ही कभी सेक्स वर्कर बनने की राह चुनी. गौरी ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था, इसकी वजह उनका सुंदर ना होना है शायद. ना तो वो गोरी हैं, ना ही इतनी सुंदर की किसी को लुभा सकें, इसलिए शायद वो बच भी पाईं.

और ताली सीरीज यहीं पर पहली बार चूक कर जाती है. मेकर्स गौरी की इस मेन बात पर ही रिसर्च करना शायद भूल गए. क्योंकि सीरीज में असली गणेश के लुक से इतर दिखने वालीं एक्ट्रेस कृतिका देओ हैं. हालांकि कृतिका ने अपने रोल से पूरा जस्टिफाई किया है, लेकिन आप उसे गणेश से रिलेट करने पाने में असहज महसूस करेंगे. जैसा कि बॉलीवुडिया सिनेमा में अक्सर गोरी रंगत को लेकर एक ऑब्सेशन देखा गया है, वो यहां भी दिखाई पड़ता है. एक व्यूवर के तौर पर ये बहुत अखरता है. क्योंकि गणेश यानी गौरी का बचपन ऐसी छहरहरी काया-गोरी रंगत वाला नहीं था, जैसा कि पोट्रे कर दिया गया है. ऐसे में आपकी सोच रिएलिटी से परे हो जाती है.

किस रफ्तार से बजी ताली पहला एपिसोड शुरू होता है गौरी के बचपन गणेश से...जहां वो मां के आंचल में खुद को सुरक्षित महसूस करता है. उनके जैसे बनने के सपने देखता है, लेकिन पिता की धिक्कारती नजरें उससे बर्दाश्त नहीं होती है. हालांकि बड़ी बहन का साथ मिलता है. पर अचानक हुई मां की मौत के बाद अकेला पड़ा गणेश उस घर को छोड़कर भाग जाता है, और शुरू करता है अपना सफर- ट्रांसजेंडर बनने का. सीरीज में गौरी की तीन लड़ाई को दिखाने की पुरजोर कोशिश की गई है. पहली लड़ाई- आईडेंटिटी की, दूसरी लड़ाई- सर्वाइवल की, तीसरी लड़ाई- इक्वालिटी की. लेकिन इक्वालिटी की लड़ाई दिखाने के चक्कर में गणेश के गौरी बनने की कहानी कहीं अपना दम तोड़ बैठी.

गणेश का अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने की सोच और ट्रांस कम्यूनिटी की तरफ झुकाव को बखूबी दिखाया गया है. लेकिन परिवार का साथ ना मिल पाने का अफसोस और वो शर्मिंदगी, जो समाज के ना अपनाने से मिलता है, उसे ऑडियन्स को फील ना करा पाने की चूक जरूर हो गई है. आर्या में दमदार एक्टिंग की छाप छोड़ चुकीं सुष्मिता सेन भी कहीं कहीं ढीली पड़ती नजर आई हैं. मसलन सेक्स चेंज ऑपरेशन का सीन हो या किन्नर की जिंदगी से इन्फ्लुएंस होने का, सुष्मिता हल्की सी लगीं. खासकर उनके आदमी बने रहने का लुक, बहुत ओवरहाइप्ड लगता है. लेकिन वहीं कई डायलॉग सीरीज के ऐसे हैं, जिन्हें जब वो बोलती हैं तो लगता है बस यहीं ये कहानी रुक जाए. जैसे इसी का तो इंतजार था.

सब्जेक्ट से हुआ इन्जस्टिस

गौरी की लड़ाई एक प्रेरणा देने वाली कहानी है. ये कहानी ही इसलिए बन पाई है, क्योंकि ये आसान नहीं है. इससे एक इतिहास जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट में थर्ड जेंडर को मान्यता दिलवाने वाली गौरी, महाराष्ट्र इलेक्शन कमेटी की ब्रांड एम्बैसेडर बनने वाली पहली ट्रांसजेंडर गौरी की आपबीती बयां करना असल में मुश्किल काम है. ये हम और आप जैसे लोगों के लिए समझना उतना ही मुश्किल है, जितना कि एक बच्चे को पढ़ना लिखना सिखाना. क्योंकि सब कुछ शुरू से जो शुरू करना होता है. ऐसे में ताली के डायरेक्टर रवि जाधव ने एक बड़ा बीड़ा उठाते हुए इस सीरीज का निर्माण किया. उनके कंधों पर इस पूरी कम्यूनिटी का भार था, जिसे वो पूरी तरह से सही मुकाम तक पहुंचा नहीं पाए. सीरीज में बहुत सी जगह ऐसी है, जहां आपको लगेगा कि कोई ड्रामेटिक सीन देखने को मिलेगा, तो आप निराश महसूस करेंगे. फिर आप ऐसे में सोचेंगे कि शायद डायरेक्टर ने सेंसिटिव सब्जेक्ट देखते हुए ऐसा किया होगा, पर आपको वो भी होता दिखाई नहीं देता है. फिर आप किसी दमदार सीन के इंतजार में पूरे एपिसोड को खत्म कर डालेंगे. यकीन मानिए चार एपिसोड तो हमने ही उबासी मारते हुए निकाले हैं.

सीरीज में वो आपाधापी, असमंजस जरूर दिखाए गए हैं, जिससे एक ट्रांस कम्यूनिटी गुजरती है. लेकिन उसे दर्शाने का तरीका थोड़ा लचर है. आप विक्टिम से ज्यादा बगल के लोगों से अपने आप को कनेक्ट कर लेंगे. एक आम आदमी होने के नाते आप सोच पड़ेंगे कि हां हमारे घर में होता तो हम भी वही सलूक करते या ऐसा ही तो होता. कौन इतनी जल्दी एक्सेप्ट कर पाता है. वहीं जिस सीन का आपको बेहद बेसब्री से इंतजार रहता है, वो है गणेश के गौरी बनने का. उस सीन को इतने आराम से निकाल दिया गया है कि आप उसका इम्पैक्ट दूर दूर तक फील नहीं कर पाएंगे. एक सेमिनार के दौरान अपनी ही कम्यूनिटी से बेइज्जत होने के बाद गणेश डिसाइड करता है कि वो सेक्स चेंज ऑपरेशन करवाएगा. लेकिन उसके इस फैसले का आप पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वहां ना तो बैकग्राउंड म्यूजिक ऐसा कमाल का है कि आपकी नजर टिक जाए और ना ही सुष्मिता के डायलॉग में दम है.

लोकल ट्रेन की तरह गुजरते सीन

कई जगह आपको रिसर्च की भी कमी खलती है. आपके मन में कई सिंपल से सवाल उठने लगेंगे कि अगर गौरी इतनी गरीब है कि एक छोटी सी खोली यानी कमरा लेकर किराए पर रह रही है. गुजारा करने के लिए होटल में वेटर की नौकरी कर रही है, तो उसके पास बेहद महंगा सेक्स चेंज ऑपरेशन कराने के पैसे कहां से आए? और अगर एक NGO उसकी हेल्प कर रहा है तो क्यों और कैसे? सिर्फ एक पर इतना मेहरबान क्यों? वहीं एक और सीन है, जिसे देखकर आप कहेंगे, अरे हो गया, इतना ही था? दरअसल, गौरी को आता है यूएस का बुलावा, जहां एक यूनिवर्सिटी में जाकर उसे स्पीच देनी है. पहली बार होगा कि कोई भारतीय ट्रांसजेंडर विदेश में स्पीच देगी. इसे देख आपको लगेगा कि गौरी की कोई दमदार स्पीच दिखाई जाएगी, लेकिन नहीं......यहां भी आप निराश होंगे. क्योंकि आपको फ्लाइट का एक कॉमेडीनुमा सीन दिखाकर बात ही काट दी जाएगी.

सुष्मिता के भाव और पंच

सीरीज में दम आता है और जाता है. इकलौती चीज जो बेहद अच्छी है, वो है बीच-बीच में आने वाला पंच. कई डायलॉग्स ऐसे हैं जो सही मायने में आपके जहन में उतरते हैं. जैसे - 'इस देश को यशोदा की बहुत जरूरत है', 'ताली बजाउंगी नहीं बजवाउंगी', 'अगर आप मर्द या औरत नहीं तो जिंदा नहीं, जो गलत है उसे तो बदलना पड़ेगा', 'मुझे स्वाभिमान, सम्मान और स्वतंत्रता तीनों चाहिए. भारत एक पुर्लिंग शब्द है, फिर भी हम उसे मां बुलाते हैं और मां अपने बच्चों में कोई फर्क नहीं देखती है.' ऐसे डायलॉग्स को सुनकर आपको लगता है कि नहीं इस सीरीज में अब भी जान बाकी है. हालांकि सीरीज का एक हिस्सा और है जो बेहद दमदार है. वो है इंटरव्यू का, जहां गौरी समानता के अधिकार पर बात करती है. यहां ना सिर्फ गौरी एकंर्स की बोलती बंद करती है, बल्कि अपनी बातों से सही मायने में ऐसा इम्प्रेस करती है कि चैनल में ट्रांस जेंडर्स के लिए दो सीट आरक्षित करवा कर निकलती है.

गणेश के रोल के लिए कृतिका देव को कास्ट किया गया है, वहीं गौरी सावंत का चेहरा सुष्मिता सेन हैं. इसमें कोई दोराय नहीं कि सुष्मिता गौरी के रूप में एक सशक्त चेहरा जरूर लगती हैं. उनकी ताली और आंखें आपको बेहद इम्प्रेस करती हैं. लेकिन अगर स्क्रीनप्ले और बैकग्राउंड म्यूजिक पर कायदे से ध्यान दिया गया होता तो इससे बेहतर सब्जेक्ट और सीरीज और कोई नहीं हो सकती थी. गौरी सावंत की लाइफ से जनता को रूबरू कराने का इससे अच्छा जरिया डायरेक्टर के पास नहीं हो सकता था. कहानी जबरदस्त है, लड़ाई भी दमदार है, पंच भी धांसू हैं लेकिन फिर भी ये सीरीज आपके दिल पर दस्तक देने में नाकामयाब साबित होती है. और हां बिग बॉस के फैंस के लिए खास खबर, आपके फेवरेट वॉइस ओवर आर्टिस्ट विजय विक्रम सिंह इस सीरीज में वकील का रोल निभाते दिखेंगे. रोल छोटा है, लेकिन स्क्रीन पर वो अच्छे लगे हैं.

Source: AajTak
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कच्चे तेल पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स

Posted By: Pawan George Posted On: Sep 30, 2023
कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ाकर 12,100 रुपये कर दिया है।

Windfall Tax: कच्चे तेल पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स, ATF और डीजल पर घटा निर्यात शुल्क

Windfall Tax सरकार की ओर से घरेलू उत्पादित कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को 10000 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 12100 रुपये प्रति टन कर दिया है। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क को घटाकर 5 रुपये प्रति लीटर कर और एटीएफ पर निर्यात शुल्क को घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसके अलावा पेट्रोल पर निर्यात शुल्क को शून्य रखा है।

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। केंद्र सरकार की ओर से कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को बढ़ाकर 12,100 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। वहीं,डीजल पर निर्यात शुल्क को घटाकर 5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जो कि पहले 5.50 रुपये प्रति लीटर था। इसके अलावा जेट फ्यूल पर निर्यात शुल्क को घटाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जो कि पहले 3.5 रुपये प्रति लीटर था। पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य बना हुआ है।

सरकार द्वारा घोषित की गई विंडफॉल टैक्स की नई दरें 30 सितंबर से लागू हो गई हैं। विंडफॉल टैविक्स की समीक्षा सरकार की ओर से हर 15 दिनों में की जाती है। बाजार में चल रही कीमतों के आधार पर ही विंडफॉल टैक्स को किया जाता है।

इससे पहले 15 सितंबर को विंडफॉल टैक्स की नई दरें घोषित की गई थी। उस समय घरेलू उत्पादित कच्चे तेल पर टैक्स को 6700 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति टन कर दिया था। डीजल पर निर्यात शुल्क 6 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 5.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया था। इसके अलावा एटीएफ पर निर्यात शुल्क को 6 रुपये से घटाकर 5.50 रुपये प्रति टन कर दिया था।

सरकार द्वारा पहली बार पिछले साल एक जुलाई को विंडफॉल टैक्स लगाया गया था। उस समय निर्यात किए जाने पेट्रोल और एटीएफ पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया गया था।

कच्चा तेल की कीमत 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। ओपेक देशों की ओर से कच्चे तेल के उत्पादन में लगातार कटौती करने के कारण कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।

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Source: Jagran
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एक अक्टूबर से महंगा हो जाएगा ऑनलाइन गेम खेलना

Posted By: Preeti Dabar Posted On: Sep 30, 2023
अगले महीने से ऑनलाइन गेमिंग पर लगेगा 28 प्रतिशत जीएसटी।

GST New Rule: एक अक्टूबर से महंगा हो जाएगा ऑनलाइन गेम खेलना, वित्त मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन

GST New Rule एक अक्टूबर से ऑनलाइन गेमिंग कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। इसके लिए सेंट्रल जीएसटी और आईजीएसटी एक्ट में भी बदलाव किया गया है। जीएसटी की नई दरों की समीक्षा छह महीने के बाद यानी एक अप्रैल 2024 को होगी। वित्त मंत्रालय ने इसे लेकर नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। (फाइल फोटो)

नई दिल्ली, बिजनेस डेस्क। अक्टूबर की पहली तारीख से ऑनलाइन गेमिंग, कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएगी। इसके बाद लोगों को पहले के मुकाबले अधिक टैक्स देना होगा। इसका नोटिफिकेशन वित्त मंत्रालय की ओर से भी जारी कर दिया गया है।

ऑनलाइन गेमिंग, कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर जीएसटी की दर को लेकर राज्य सरकारों और सभी पक्षों के साथ बातचीत के बाद सरकार की ओर से 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने का फैसला किया था। इसके लिए सेंट्रल जीएसटी एक्ट में बदलाव भी किया गया है। इसके बाद सप्लाई को लॉटरी की तरह ही एक्शनेबल क्लेम माना जाएगा।

इसके अलावा आईजीएसटी एक्ट में भी संशोधन किया गया है। इसके लिए बाहर की किसी कंपनी को भारत में ऑनलाइन गेमिंग आदि का कारोबार करने के लिए पंजीकरण कराना आवश्यक होगा।

ये भी पढ़ें- GST Council की अगली बैठक 7 अक्टूबर को होगी, वित्त मंत्री समेत राज्यों के मंत्री होंगे शामिल

जीएसटी काउंसिल की जुलाई और अगस्त में हुई बैठक में केंद्र और राज्य सराकारों ने मिलकर ऑनलाइन गेमिंग, कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने का फैसला किया था। इसे लेकर किए गए संशोधनों को भी संसद द्वारा पिछले महीने ही पारित कर दिया गया है। इसके बाद ही वित्त मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया है। एक अक्टूबर से ऑनलाइन गेमिंग, कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

ये भी पढ़ें- Windfall Tax: कच्चे तेल पर बढ़ा विंडफॉल टैक्स, ATF और डीजल पर घटा निर्यात शुल्क

ऑनलाइन गेमिंग, कैसिनो और हॉर्स रेसिंग पर जीएसटी की दरों को लेकर रिव्यू छह महीने बाद यानी अप्रैल 2024 में होगा। इस रिव्यू बैठक में जीएसटी कानून के नई दरों के प्रभाव को देखा जाएगा। नई जीएसटी दरों पर गेमिंग कंपनियों का कहना है कि इससे उनके बिजनेस पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

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Source: Jagran
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