जीशान के लिए मुश्किल था नवाजुद्दीन संग रोमांस करना

Posted By: Jaydatt Chaudhary Posted On: Sep 11, 2023
जिशान अय्यूब

जीशान अयूब के लिए मुश्किल था नवाजुद्दीन सिद्दीकी संग रोमांस करना, बताया कैसे पूरा हुआ सीन

हड्डी में नवाजुद्दीन सिद्दीकी संग रोमांस कर रहे जीशान अयूब हमसे शूटिंग एक्सपीरियंस शेयर करते हैं. उन्होंने बताया कि नवाज को रोमांस करना उनके लिए कितना चैलेंजिंग व सरल रहा है.

जीशान अयूब इन दिनों अपनी फिल्म हड्डी को लेकर चर्चा में हैं. यहां उनका का किरदार भी बड़ा दिलचस्प है, वो फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी का लव इंट्रेस्ट प्ले कर रहे हैं. उन्होंने हमसे अपनी इस फिल्म और अपने करियर की जर्नी पर खुलकर बातचीत की है.

अब प्यार की परिभाषा को लेकर क्लीयर हूं

हड्डी के लिए हामी भरने के कारण पर जीशान कहते हैं, मुझे अपने किरदार को समझाना सबसे मुश्किल काम लगता है. फिल्म में वो एक एनजीओ चलाता है, वकील है.. उसकी अपनी एक लड़ाई है... वो नवाजुद्दीन सिद्दीकी का लवर है. उसके प्यार में है. इस किरदार को लेकर मेरे जेहन में यह था कि ये आदमी एकदम आम सा लगना चाहिए. जैसे आपको लगे कि अरे ये हमारे ही बीच का ही है. दफ्तर, मेट्रो जैसी जगहों में यह मिलता है. किरदार बहुत ही सादा है, जिस पर ध्यान नहीं दिया जाता है. इस किरदार से मेरा टेकअवे यही रहा है कि मुझे पहले पता नहीं था कि एक ट्रांसजेंडर को प्यार के लिए कैसे अप्रोच किया जा सकता है, वो अब समझ आ गया है. मैंने समझा है कि प्यार एक फिजिकल चीज नहीं है. आप उस आदमी के रूह से प्यार करते हैं. मैं अगर किसी के साथ एक घंटा बिना कुछ बोले वक्त गुजार सकता हूं, इसका मतलब कि बॉन्डिंग कमाल की है. यह प्यार रूहानी है.

नवाज भाई ने सहज कर दिया था

नवाज के साथ रोमांस करने के एक्स्पीरियंस पर जीशान कहते हैं, सेट पर वो अक्सर कहते थे कि अरे चलो कोना पकड़ लेते हैं. एक दोनों ही एनएसडी से थे. हम दोनों का गिव ऐंड टेक बहुत ही स्मूथ था. हमारा पहला सीन भी कुछ ऐसे ही शूट हुआ, जहां हम शादी कर रहे हैं. इतना ही ब्रीफ दिया गया था कि कोर्ट मैरिज है और आप दोनों की शादी हो रही है. हम वहां बहुत ही नैचुरल तरीके से एक्शन-रिएक्शन कर रहे थे. हमें कुछ बताया नहीं गया था, वहीं से केमिस्ट्री बननी शुरू हो गई थी. उन्होंने कंफर्ट दिया कि जिससे मैं खुलकर खुद को एक्सप्रेस कर पाया था. उन्होंने दरअसल मेरे किरदार को बहुत आसान बना दिया था.

एक वक्त के बाद फर्क नहीं पड़ता है

जीशान एक लंबे समय से इंडस्ट्री में हैं. जमीन तलाशने पर कहते हैं, हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में टैलेंट को बहुत बड़े एसेट के तौर पर नहीं माना जाता है. ये क्रूर सच्चाई है. हां, आपके अंदर टैलेंट है, तो बेशक आपको जगह मिल जाएगी, लेकिन भेदभाव तो होता ही है. फिर खुद ही एहसास होता है कि यार इनको चाहिए ही नहीं. इन्हें जरूरत ही नहीं है. ये ऐसे लोग हैं कि आपने एक्टिंग कर ली, तो बहुत बढ़िया और नहीं की, तो कोई फर्क नहीं पड़ता है. ये मीडियोक्रिटी सेलिब्रेट करने पर यकीन रखते हैं. उसे देखकर आपको बुरा लगता है. एक पॉइंट के बाद हंसी आने लगती है और अब तो फर्क ही नहीं पड़ता है. पहले फ्रस्ट्रेशन था, फिर गुस्सा, हंसी और अब फर्क नहीं पड़ने वाला एटीट्यूड आ चुका है. आप यह जानते हो कि इसे बदला नहीं जा सकता है. आप घुसकर कोई क्रांति ला देंगे, ये ऐसा करने नहीं देंगे. यहां क्रांती तो नहीं आ पाएगी. हां, यहां ये होगा कि जो सेंसिबल लोग काम कर रहे हैं और आपके टैलेंट को तवज्जों दे रहे हैं, वो बढ़ जाएंगे. देखो, मास लेवल पर जो चल रहा है, उसे बदलने में वक्त तो लगेगा ही. एक वक्त होगा, जब सेंसिबल लोगों की तादाद बढ़ेगी और मीडियोक्रिटी सेलिब्रेट करने वाले घटेंगे. बस इसी उम्मीद से आप आगे बढ़ते जाते हैं.

Source: AajTak
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भारतीय रेलवे क्‍यों 56 वर्षों तक ट्रेनों में नहीं थी शौचालय की सुविधा

Posted By: Jaydatt Chaudhary Posted On: Sep 29, 2023
शुरुआत में ट्रेन में टॉयलेट नहीं होते थे. (shutterstock)

क्‍यों 56 वर्षों तक ट्रेनों में नहीं थी शौचालय की सुविधा? कैसे लगे टॉयलेट? दिलचस्‍प है कहानी

Indian Railway Toilet Story: ट्रेन भारत में यातायात का सबसे पसंदीदा साधन है. लंबे सफर के लिए ज्यादातर लोग ट्रेन में ही यात्रा करना पसंद करते हैं. भारत में कई श्रेणियों की ट्रेनें चलती हैं. अलग-अलग श्रेणी की ट्रेनों में सुविधाएं भी अलग-अलग मिलती हैं. आज वंदे भारत एक्‍सप्रेस जैसी लग्‍जरी ट्रेन भी भारत में दौड़ रही हैं जिसमें होटलों जैसी सुविधाएं रेल यात्रियों को मिलती है. लंबी दूरी तय करने वाली ट्रेनों को तो हम चलता-फिरता घर भी कह सकते हैं. लेकिन, एक समय ऐसा भी था जब भारतीय ट्रेनों में टॉयलेट भी नहीं होते थे. भारत में ट्रेनें 56 साल तक बिना टॉयलेट के ही पटरियों पर दौड़ी. भारत में पहली ट्रेन 1853 में चली थी और किसी ट्रेन में पहला शौचालय साल 1909 में लगा. ट्रेन में शौचालय लगने का किस्‍सा काफी मजेदार है.

1909 से पहले तक अगर किसी यात्री को टॉयलेट जाना होता था तो उन्‍हें स्‍टेशन पर ट्रेन रुकने का इंतजार करना होता था. ट्रेन के रुकने पर स्टेशन पर बने शौचालय में जाकर या फिर खुले मैदान-जंगल में नित्य क्रिया करते थे. हालांकि, आज से करीब 114 साल पहले एक ऐसी घटना घटी की रेलवे को ट्रेन में शौचालय की सुविधा शुरू करनी पड़ी. रेल पटरियों के किनारे टॉयलेट जाने के बाद भागकर ट्रेन पकड़ने की कोशिश करते गिरे एक रेल यात्री द्वारा रेलवे अधिकारी को लिखे पत्र ने भारतीय ट्रेनों में शौचालय लगने का रास्‍ता साफ किया. टॉयलेट लगवाने के लिए लिखा गया यह सिफारिशी पत्र आज भी रेल संग्रहालय में रखा गया है.

ये भी पढ़ें- अब रेलवे स्‍टेशन पर नहीं होगी चोरी-चक्‍कारी, प्‍लेटफॉर्म पर पहुंचते ही धरे जाएंगे चोर-उचक्‍के, जानिए कैसे?

आखिल चंद्र का करें धन्‍यवाद भारतीय रेल में शौचालय की शुरुआत साल 1909 में की गई. शायद, इसमें भी और देर होती अगर आखिल चंद्र सेन नाम के एक यात्री का रेल में सफर के दौरान पेट न खराब होता. पेट खराब होने की वजह से उन्‍हें पश्चिम बंगाल के अहमदपुर स्‍टेशन पर उतरना पड़ा. वे पटरियों के पास शौच करने चले गए. कुछ देर बाद गार्ड ने सीटी बजा दी और गाड़ी चल पड़ी. आखिल चंद्र सेन अपना लोटा और धोती पकड़कर भागे. वे स्‍टेशन पर गिर गए. उनकी धोती खुल गई और उनकी गाड़ी छूट गई. ट्रेन के गार्ड की इस हरकत की शिकायत उन्‍होंने लेटर लिखकर रेलवे के साहिबगंज मंडल कार्यालय से की.

ओखिल चंद्र सेन ने पत्र में लिखा, “श्रीमान, मैं ट्रेन से अहमदपुर स्टेशन पहुंचा. मेरा पेट खराब था. इसलिए मैं शौच के लिए चला गया. मैं निवृत हो ही रहा था कि गार्ड ने सीटी बजा दी, मैं एक हाथ में लोटा और दूसरे में धोती पकड़कर भागा. मैं गिर गया और स्टेशन पर मौजूद औरतों और मर्दों सबने देखा…मैं अहमदपुर स्टेशन पर ही रह गया. यह बहुत ग़लत बात है, अगर यात्री शौच के लिए जाते हैं तब भी गार्ड कुछ मिनटों के लिए ट्रेन नहीं रोकते? इसलिए मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि गार्ड पर भारी जुर्माना लगाया जाए. वर्ना यह खबर अखबार को दे दूंगा.”

रेलवे ने समझा यात्रियों का दर्द ऐसा माना जाता है कि ओखिल चंद्र के पत्र के बाद ही रेलवे अधिकारियों ने ही ट्रेन में शौचालय ने होने पर यात्रियों को होने वाली परेशानियों को समझा. इसके बाद रेलवे ने 50 मील से ज्यादा दूरी तय करने वाली ट्रेनों में शौचायल बनाने की कवायद शुरू की. इस तरह ओखिल चंद्र सेन का भारतीय रेलों में टॉयलेट की सुविधा शुरू करवाने में अहम योगदान है.

लोको पायलट को करना पड़ा और लंबा इंतजार यात्रियों को भले ही यह सुविधा 1909 में मिल गई हो, लेकिन लोको पायलटों को रेल इंजन में इस सुविधा को पाने के लिए 2016 तक इंतजार करना पड़ा. 2016 से पहले लोको में टॉयलेट नहीं थे. इसके बाद वहां टॉयलेट लगने शुरू हुए हैं.

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Source: News18
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मनी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पर सरकार का बड़ा ऐलान

Posted By: Preeti Dabar Posted On: Sep 29, 2023
सरकार ने जारी की स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पर नई ब्याज दरें

Small Savings Scheme: स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पर सरकार का बड़ा ऐलान, इस स्कीम की ब्याज दरों में हुआ इजाफा

नई दिल्ली. फेस्टिव सीजन से पहले मोदी सरकार ने स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश करने वालों को तोहफा दिया है. सरकार ने अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स (Small Savings Schemes) पर ब्याज दरों की घोषणा कर दी है. सरकार ने 5 साल के रेकरिंग डिपॉजिट (RD) पर ब्याज दर बढ़ा दी है. हालांकि एक स्कीम को छोड़कर किसी भी स्कीम की ब्याज दर में बदलाव नहीं हुआ है.

5 साल की आरडी पर 20 बेसिस प्वाइंट यानी 0.20 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है. 5 साल की आरडी पर ब्याज दर को 6.5 फीसदी से बढ़ाकर 6.7 फीसदी किया गया है. यह नई दरें 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक लागू रहेंगी. सीनियर सिटीजंस सेविंग स्कीम (SCSS), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), पीपीएफ (PPF), किसान विकास पात्र (KVP) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में में निवेश पर पहले की तरफ ब्याज मिलता रहेगा.

ये भी पढ़ें- अब रेलवे स्‍टेशन पर नहीं होगी चोरी-चक्‍कारी, प्‍लेटफॉर्म पर पहुंचते ही धरे जाएंगे चोर-उचक्‍के, जानिए कैसे?

किस स्कीम में कितना मिल रहा है ब्याज? सेविंग्स अकाउंट- 4.0 % ब्याज 1 साल के टाइम डिपॉजिट- 6.9 % ब्याज 2 साल के टाइम डिपॉजिट- 7.0 % ब्याज 3 साल के टाइम डिपॉजिट- 7.0 % ब्याज 5 साल के टाइम डिपॉजिट- 7.5 % ब्याज 5 साल के रेकरिंग डिपॉजिट- 6.7 % ब्याज (अब तक 6.5 फीसदी था) सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम- 8.2 % ब्याज मंथली इनकम अकाउंट स्कीम- 7.4 % ब्याज नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट- 7.7 % ब्याज पब्लिक प्रोविडेंट फंड- 7.1 % ब्याज किसान विकास पत्र- 7.5 % ब्याज (115 महीने में मैच्योरिटी पर) सुकन्या समृद्धि योजना- 8.0 % ब्याज

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Source: News18
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Vedanta अपनी पांच कंपनियों को वेदांता लिमिटेड से करेगा डीमर्ज

Posted By: Pawan George Posted On: Sep 29, 2023
यह कंपनियां अब अलग-अलग होकर शेयर बाजार में लिस्ट होंगी।

Vedanta अपनी पांच कंपनियों को वेदांता लिमिटेड से करेगा डीमर्ज, जानिए शेयरधारकों को कितना मिलेगा शेयर

शेयरहोल्डर बनाने के लिए खनन प्रमुख वेदांत लिमिटेड ने आज एल्यूमीनियम तेल गैस और स्टील सहित अपने पांच प्रमुख व्यवसायों को अलग करने का फैसला किया। ये कंपनियां अब स्टॉक एक्सचेंज पर अलग से सूचीबद्ध होंगी। इस खबर में जानिए मौजूदा शेयरधारकों को कितना शेयर मिलेगा। इसके अलावा डीमर्ज होने वाली कंपनियों को भी जानिए। पढ़िए क्या है पूरी खबर।

पीटीआई, नई दिल्ली: शेयरहोल्डर वैल्यू को बनाने के लिए खनन समूह वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd) ने आज एल्यूमीनियम, तेल और गैस और स्टील सहित अपने पांच प्रमुख बिजनेस को डीमर्ज करने का फैसला लिया है। यह कंपनियां अब अलग-अलग होकर शेयर बाजार में लिस्ट होंगी।

वेदांता लिमिटेड के शेयरधारकों को वर्तमान में लिस्टेड वेदांता लिमिटेड के प्रत्येक 1 शेयर के लिए पांच नई लिस्टेड कंपनी में से प्रत्येक में एक शेयर मिलेगा। आपको बता दें कि डीमर्जर की प्रक्रिया 12 से 15 महीने में पूरा होगा।

वेदांता ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि

वेंडाटा लिमिटेड के बोर्ड से मंजूरी के बाद एल्यूमीनियम, तेल और गैस, बिजली, स्टील और लौह सामग्री, और बेस मटेरियल अलग हो जाएंगे और ये सभी कंपनियां शेयर बाजार में लिस्ट होंगे।

वेदांता लिमिटेड के पास हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के साथ-साथ स्टेनलेस स्टील और सेमीकंडक्टर/डिस्प्ले के नए व्यवसायों की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी जारी रहेगी।

वेदांता एल्युमीनियम: कंपनी के पास कैप्टिव पावर और एलुमिना रिफाइनरी के साथ भारत में सबसे बड़ी उत्पादन क्षमता है। कंपनी कोयला खदानों और बॉक्साइट खदानों का विकास जारी रखेगी। इसमें बाल्को में कंपनी की 51 फीसदी हिस्सेदारी भी शामिल है।

वेदांता पावर: भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादकों में से एक होगा।

वेदांता बेस मेटल्स: तूतीकोरिन, फुजैराह गोल्ड, सिलवासा और वीजेडएल सहित अंतरराष्ट्रीय बेस मेटल परिसंपत्तियों का एक विविध पोर्टफोलियो होगा।

वेदांता ऑयल एंड गैस: केयर्न व्यवसाय, जो भारत का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का कच्चा तेल उत्पादक होगा।

वेदांता स्टील एंड फेरस: सेसा आयरन अयस्क, सेसा कोक, डब्ल्यूसीएल (लाइबेरिया) सहित लौह अयस्क के भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के निर्यातकों में से एक होगा और इलेक्ट्रोस्टील स्टील में 95.95 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।

वेदांता लिमिटेड: वर्तमान में सूचीबद्ध इकाई एलसीडी और डिस्प्ले ग्लास का विनिर्माण, सेमीकंडक्टर व्यवसाय, स्टेनलेस व्यवसाय और हिंदुस्तान जिंक में हिस्सेदारी का काम करेगी।

Source: Jagran
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Global Crude Oil Prices

Posted By: Tarun Kumar Posted On: Sep 29, 2023
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होती है देश की इकोनॉमी

Global Crude Oil Prices: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का जेब पर पड़ता है असर, इस तरह प्रभावित होती है इकोनॉमी

Impact Of Crude Oil Prices On Indian Economy वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। वर्तमान में क्रूड ऑयल की कीमतें 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। आज हम आपको बताएंगे कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत पर क्या असर पड़ता है? आइए इस आर्टिकल में इस सवाल का जवाब जानते हैं। (जागरण फाइल फोटो)

बिजनेस डेस्क,नई दिल्ली। India's Crude Oil Import Bill 2023: देश में बढ़ती महंगाई से हर वर्ग जूझ रहा है। हर वर्ग पर महंगाई की मार पड़ रही है। देश में महंगाई बढ़ने की वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमत मानी जाती है। आइए, जानते हैं कि जब भी वैश्विक आधार पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती है तो उसका असर किन-किन फेक्टर्स पर पड़ता है? आपको बता दें कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। यह कीमत में बढ़ोतरी की वजह है कि सऊदी अरब और रूस ने तेल की कटौती करने का फैसला लिया है।

जून महीने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। कच्चे तेल की कीमत 10 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इस महीने यानी सितंबर के बीच में इसकी कीमत 93 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के आने से वैश्विक स्तर पर कई उत्पाद की कीमतों में बदलाव हुआ है।

ये भी पढ़ें - Festive Season से पहले बढ़ सकती है Petrol-Diesel की कीमत, जानिए भारत के सामने क्या खड़ी है चुनौती

जब भी कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो उसका सीधा असर देश की इकोनॉमी पर देखने को मिलता है। इसकी वजह यह है कि भारत तेल के आयात पर निर्भर करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमत अर्थव्यवस्था पर असर डालती है। देश में महंगाई की दरों में बढ़ोतरी होती है। यह देश के लिए काफी बड़ी चिंता होती है।

इसके अलावा देश की कई कंपनी जो कच्चे माल के तौर पर क्रूड ऑयल का प्रयोग करते हैं उनको भी नुकसान का सामना करना पड़ता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से केवल ऑयल एक्‍सप्‍लोरेशन कंपनियों का प्रॉफिट होता है। जैसे ही वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर महंगाई की दरों पर दिखने लगता है। वैसे ही यह देश की जीडीपी (GDP) को नीचे गिरा देता है।

देश के ऑयल और गैस सेक्टर पर भी इसका असर देखने को मिलता है। देश में पेट्रोल-डीजल, एटीएफ () की कीमत कच्चे तेल के आधार पर तय करती है। ऐसे में जहां एक कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है वहीं, इनकी कीमत में भी इजाफा होता है।

फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कीमत (Petrol-Diesel Price) स्थिर है। इनकी कीमत पिछले साल मई में राष्ट्रीय तौर पर बढ़ी थी। पेट्रोल- डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश के सभी समानों पर देखने को मिलता है। इसकी वजह है कि ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है। जब ट्रांसपोर्ट महंगा होता है तो लेनदेन के सामानों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होती है।

उदाहरण के तौर पर अगर अभी पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर है और चीनी की कीमत 50 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं अगर पेट्रोल की कीमत 150 रुपये प्रति लीटर हो जाती है तो चीनी की कीमत भी बढ़ जाएगी। इसकी वजह है कि ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाता है।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर शेयर मार्केट पर भी देखने को मिलता है। आप सभी जानते हैं कि भारतीय करेंसी रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में ट्रेड करता है। अगर कच्चे तेल की कीमत बढ़ जाती है तो रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो जाता है। अगर 1 डॉलर की कीमत 80 रुपया है तो कच्चे तेल की कीमत बढ़ जाने के बाद डॉलर मजबूत हो जाता है यानी वह 1 डॉलर की कीमत 80 रुपये के पार हो जाता है।

इसी तरह ऑयल कंपनी और गैस कंपनी के स्टॉक के साथ कई और कंपनी के स्टॉक में उतार-चढ़ाव आ जाते हैं। वहीं, शेयर बाजार के दोनों स्टॉक एक्सचेंज पर भी इसका असर पड़ता है।

ये भी पढ़ें - Crude Oil Price and Economy: कच्चे तेल के दाम का देश की अर्थव्यवस्था और आपकी जेब से क्या है कनेक्शन

Source: Jagran
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